विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission)

सर्वप्रथम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) की नींव सन 1946 में सार्जेंट रिपोर्ट (1944) की सिफारिश में रखी गई। सार्जेंट रिपोर्ट ने 1944 में अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान समिति की स्थापना के लिए सिफारिश की थी। सन 1946 अर्थात स्वतंत्रता से पूर्व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को विश्वविद्यालय अनुदान समिति के नाम से जाना जाता था।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग अर्थात राधाकृष्णन आयोग की सिफारिश से 25 दिसंबर 1953 में इसका नाम विश्वविद्यालय अनुदान समिति के नाम के स्थान पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) रखा गया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रथम अध्यक्ष- शांति स्वरूप भटनागर (1953-1955)।

इतिहास

विश्वविद्यालय अनुदान समिति जोकि 1945 में गठित हुई थी का कार्य भारत के प्रमुख तीन विश्वविद्यालय, बी.एच.यू. (बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय), ए.एम.यू. (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) और डी.यू. (दिल्ली विश्वविद्यालय) को अनुदान अर्थात सहायता प्रदान करना था। 1947 के बाद विश्वविद्यालय अनुदान समिति के कार्यभार में बढ़ोतरी हो गई तथा संपूर्ण भारत के विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय अनुदान समिति के ऊपर आ गई। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात यूनिवर्सिटी ग्रांड कमेटी अर्थात विश्वविद्यालय अनुदान समिति को 1948 में पुनः राधाकृष्णन आयोग द्वारा स्थापित किया गया तथा विश्ववद्यालय अनुदान कमेटी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया।

सन 1952 में सरकार द्वारा निर्धारित किया गया कि विश्वविद्यालय एवं उच्च शैक्षिक संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान कमेटी द्वारा नियंत्रित किया जाए। इसके पश्चात 28 दिसंबर 1953 में शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का उद्घाटन किया गया तथा संवैधानिक रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नवंबर 1956 में संसद के एक अधिनियम द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षा के एक वैज्ञानिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के लिए कोठारी आयोग ने लिखा है कि,

“संपूर्ण उच्चतर शिक्षा को एक ही अभिन्न इकाई माना जाना चाहिए तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को अंततः उच्च शिक्षा का सर्वांगीण प्रतिनिधित्व करना चाहिए।”

University Grant Commission
1956

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग क्या है- परिचय

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) केंद्र सरकार का आयोग है जो विश्वविद्यालयों को मान्यता देता है तथा उनको अनुदान देता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) विश्वविद्यालय शिक्षा में शिक्षण और अनुसंधान के मानक का समन्वय, निर्धारण एवं रख-रखाव का कार्य भी देखती है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के कार्य

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) का गठन विभिन्न विश्वविद्यालयों को अनुदान देने तथा उनमें समन्वय बनाने और उनके स्तर को बनाए रखने हेतु मानक तय किया गया था। यह संस्था केंद्रीय और राज्य सरकार से संबंधित उच्च संस्थानों को जोड़ने की कड़ी है। आयोग के प्रमुख कार्य निम्न है-

1- आयोग उच्च शिक्षा के स्तरों के अनुरक्षण एवं समन्वय से संबंधित निम्न कार्य करता है-

  • विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम की पुनः संरचना करना।
  • विश्वविद्यालय के चयनित विभागों में विशेष सहायता के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करना।
  • अनुसंधान कार्यों को प्रोत्साहन हेतु सहायता प्रदान करना।
  • परीक्षा समिति में सुधार हेतु सुझाव।
  • शिक्षकों के चयन हेतु आवश्यक कानून नियम बनाना तथा उनके शिक्षण के शर्तें एवं न्यूनतम योग्यता निर्धारित करना।

2- आयोग देश में उच्च शिक्षा के लिए कार्यरत सभी विश्वविद्यालयों में विज्ञान, सामाजिक-अध्ययन, कला, पर्यावरण-शिक्षा, अभियन्त्रिय एवं प्रौद्योगिकी के लिए अनुदान देता है।

3- आयोग उच्च शिक्षा देने वाले महाविद्यालयों के विकास एवं संवर्धन के लिए निम्नलिखित कार्य करता है-

  • विशेष सहायता।
  • स्नातक एवं परास्नातक के अध्ययन विकास के लिए सहायता।
  • स्वायत्त महाविद्यालयों के विकास के लिए सहायता।

4- उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करता है एवं विकलांग छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति प्रदान करता है।

5- केंद्र सरकार को उच्च शिक्षा से संबंधित सलाह देना।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का संगठन

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) के कुल 12 सदस्य होते हैं जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, केंद्रीय सरकार के 2 प्रतिनिधि, 4 विश्वविद्यालयों के शिक्षक प्रतिनिधि तथा 4 की नियुक्ति कुलपतियों ख्याति प्राप्त शिक्षाविदों से की जाती है।

अध्यक्ष– प्रोफेसर धीरेंद्र पाल सिंह

उपाध्यक्ष– डॉक्टर भूषण पटवर्धन

सचिव– श्री अमित खरे

अपर सचिव– श्री राजीव रंजन (राज्य व्यय विभाग)

अन्य सदस्य

प्रोफेसर रघुवेंद्र पी तिवारी- (कुलपति) पंजाब विश्वविद्यालय

डॉ. उमा चंद्रशेखर वैद्य (पूर्व कुलपति), कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, नागपुर, महाराष्ट्र

प्रोफेसर सुषमा यादव (कुलपति), भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलन, हरियाणा

प्रोफेसर ई. सुरेश कुमार (कुलपति), इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस यूनिवर्सिटी, तमका, हैदराबाद तेलंगाना

डॉ किरण हजारिका (प्रधानाचार्य), तेंगाखत महाविद्यालय, असम

डॉक्टर नागेश ठाकुर (प्रोफेसर), भौतिक विज्ञान, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला

डॉ. एम.के. श्रीधर (प्रोफेसर), बेंगलुरु विश्वविद्यालय

डॉ. शिवराज (प्रोफेसर), रासायनिक विज्ञान- ओसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, तेलंगाना

आयोग के सदस्य में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है जिसमें अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है तथा उपाध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है।

कार्यालय

मुख्यालय– नई दिल्ली

क्षेत्रीय कार्यालय

सन 1994-1995 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा देश में 6 क्षेत्रीय कार्यालय बनाए गए जो निम्न हैं- ं

उत्तरी क्षेत्र- गाजियाबाद (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल-प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड)

मध्यवर्ती क्षेत्र- भोपाल (मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान)

पश्चिमी क्षेत्र- पुणे (महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा)

दक्षिणी क्षेत्र- हैदराबाद (केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक)

पूर्वी क्षेत्र- कोलकाता (पश्चिम-बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, सिक्किम)

उत्तर पूर्वी क्षेत्र- गुवाहाटी (असम, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल-प्रदेश, मिजोरम)

वर्तमान स्थिति

कुछ वर्ष पहले मार्च 2015 में MHRD के मंत्री द्वारा नियुक्त एक समिति ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) अपने कार्य करने में समर्थ नहीं है तथा वह अपने कार्य करने में असफल रहा है अतः उसे बंद कर देना चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को हटाकर उसके स्थान पर एक उच्च शिक्षा नियामक बनाने के बारे में बताया गया जिसका नाम हीरा (Heera- Higher Education Empowerment Regulation Agency) रखा जाए।

27 जून 2018 में MHRD ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम-1956 को निरस्त करने की घोषणा की तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग प्रतिस्थापित कर उसके स्थान पर HECI (Higher Education Commission of India) को रखने की सिफ़ारिश की। किंतु कड़ी राजनीतिक विरोध के कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भंग करने के बिल को यहीं रोक दिया गया।

यह भी जानें-

आचार्य नरेंद्र देव समिति (1952-1953)

माध्यमिक शिक्षा आयोग (मुदालियर आयोग), 1952-53

कोठारी आयोग, 1964-66

निरौपचारिक शिक्षा की संस्थाएं

Banaras Hindu University

1 thought on “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission)”

Comments are closed.