उपविषयी या प्रकरण उपागम (Topical Approach)

प्रकरण उपागम अध्ययन की एक ऐसी विधि है जिसमें शिक्षक एक ऐसे प्रकरण का निर्माण करता है जिसे केंद्रीय प्रकरण के समान प्रयोग किया जाता है तथा जिसमें विभिन्न शीर्षकों की एक ऐसी श्रंखला तैयार की जाती है जिसे एक ही कक्षा में केंद्रीय प्रकरण की सहायता से सम्पन्न करा दिया जाता है तथा पुनः इस प्रकरण का प्रयोग किसी और कक्षा में नहीं होता। श्रंखला के विभिन्न शीर्षक एक दूसरे से आपस में अन्तर्सम्बन्ध रखते हैं तथा शिक्षक द्वारा बनाये गए केंद्रीय प्रकरण में सभी समायोजित होते हैं। शिक्षक प्रकरण उपागम का निर्माण छात्रों के समक्ष उनकी उम्र, क्षमता एवं रूचि के अनुसार रखा जाता है।

प्रकरण उपागम का अर्थ

प्रकरण उपागम के बारे में जानने से पहले हमें प्रकरण और उपागम को समझना आवश्यक है। प्रकरण जिसे हम आंग्ल भाषा में टॉपिक (Topic) कहते हैं। प्रकरण का अर्थ हुआ कि किसी विषय के बारे में बताना या लिखना। किसी एक विषय को समझना आदि।

उपागम जिसे आंग्ल भाषा में एप्रोच (Approach) कहते हैं। उपागम का अर्थ होता है किसी की ओर पहुंचने के रास्ते या किसी विषय को या वस्तु को समझने का तरीका। उपागम हमें बताता है कि किसी की ओर किस तरह से पंहुचा जा सके या समझा जा सके।

प्रकरण उपागम का अर्थ हुआ कि किसी शीर्षक को समझने का तरीका, उस शीर्षक तक पहुंचने का तरीका आदि। इसके अंतर्गत छात्र की किसी भी शीर्षक से सम्बंधित सम्पूर्ण समस्याओं का निदान एक ही प्रकरण के अंतर्गत कर दिया जाता है।

प्रकरण उपागम

परिचय

प्रकरण उपागम में जो प्रकरण एक कक्षा में पढ़ा दिया जाता है उसे उसके बाद किसी और कक्षा में पुनः नहीं पढ़ाया जाता। प्रकरण उपागम भाग के स्थान पर सम्पूर्णता के सिद्धांत पर चलता है। इस उपागम के अंतर्गत विभिन्न प्रकरणों की समानता के आधार पर इनके मध्य सम्बन्ध स्थापित कर सबको अलग-अलग पढ़ाने के स्थान में सभी प्रकरणों का एक केंद्रीय प्रकरण बनाया जाता है तथा सम्पूर्ण प्रकरणों को एक केंद्रीय प्रकरण की सहायता से सम्पूर्ण रूप से समझा दिया जाता है।

प्रकरण उपागम में एक श्रृंखला में बंधे हुए प्रकरणों से सम्बंधित समस्त समस्याओं का निवारण एक ही कक्षा में संपन्न क्र दिया जाता है। एक ही श्रंखला में बंधे हुए प्रकरणों का एक केंद्रीय प्रकरण होता है जिसके इर्द गिर्द सारे प्रकरण घूमते रहते हैं। छात्रों को केंद्रीय प्रकरण को अच्छे से समझा दिया जाता है तथा सम्पूर्णता के सिद्धांत का प्रयोग कर उसे एक ही कक्षा में संपन्न करा दिया जाता है।

सामयिक उपागम या प्रकरण उपागम के अंतर्गत किसी कक्षा में एक प्रकरण को लेकर उस प्रकरण से संबंधित सभी समस्याओं को दूर कर दिया जाता है। इस प्रकार के दृष्टिकोण में कोई एक प्रकरण किसी एक कक्षा में पढ़ाने के बाद दूसरी कक्षा में उस प्रकरण को फिर से नहीं पढ़ाया जाता।

प्रकरण उपागम में कुछ प्रकरण मिलकर संपूर्ण पाठ्यवस्तु (syllabus) का निर्माण करते हैं। इस प्रकार के उपागम का निर्माण बच्चे की उम्र, क्षमता एवं रुचि के अनुसार किया जाता है।

प्रकरण उपागम समष्टि मनोविज्ञान पर आधारित है। समष्टि का अर्थ हुआ कि एक संगठित संपूर्ण अर्थात किसी प्रकरण को भागों में ना बता कर उसे संपूर्ण में बताना। इस प्रकार का उपागम समग्रता के सिद्धांत पर काम करता है।

इस प्रकार के उपागम में पाठ्यक्रम निर्माण के लिए कुछ निश्चित प्रकरणों को केंद्रीय विषय मान लिया जाता है। इन प्रकरणों को छात्र की आयु वर्ग के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

प्रकरण उपागम में पाठ्यक्रम का निर्माण बच्चों की उम्र, रुचि एवं उनकी क्षमता के आधार पर होता है। जिस प्रकार बच्चा विभिन्न स्तरों से होकर गुजरता है बच्चों का पाठ्यक्रम भी उनके इन स्तरों के आधार पर निर्धारित होता है। जब बच्चा छोटा होता है तो उसकी रुचि मूर्त वस्तुओ पर होती है। मूर्त वस्तुएं जैसे खाना, कपड़े, मकान, यातायात के साधन आदि मूर्त वस्तुओं को जानने की कोशिश करता है।

प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे को उसके दैनिक जीवन में आने वाली वस्तुओ का अध्ययन करा कर उनके मूर्त अर्थात जिन्हें वह छू कर और देख कर उसकी छवि को अपने मस्तिष्क में रख सकता है, कनग्यन का विकास किया जाता है।

प्राथमिक कक्षाओं के बाद बच्चे को और कठिन प्रकरणों का अध्ययन कराया जाता है। सामाजिक अध्ययन में देखा जाए तो बच्चों को संस्था का इतिहास, देश का इतिहास, राजनीति का इतिहास, आदि का अध्ययन कराया जाता है। ये सारे प्रकरण एक दूसरे से एक मुख्य प्रकरण ‘इतिहास’ से जुड़े हुए हैं। अतः बच्चों को इन सब को अलग अलग पढ़ाने के स्थान पर सारे प्रकरणों का एक मुख्य प्रकरण बनाया जाता है और भागों के स्थान पर संपूर्ण को एक ही कक्षा में संपन्न करा दिया जाता है। तथा इस प्रकरण का प्रयोग पुनः किसी कक्षा में नहीं होता।

प्रकरण उपागम के सकारात्मक पक्ष

  1. प्रकरण उपागम की प्रकृति लचीली होती है तथा विभिन्न स्तरों में इसमें आसानी से परिवर्तन किया जा सकता है।
  2. इसके अंतर्गत छात्रों को अच्छे से पता होता है कि उन्हें क्या पढ़ाया जा रहा है।
  3. बड़ी से बड़ी सामग्री अर्थात प्रकरण को प्रकरण उपागम की सहायता से तर्कसंगत रूप से आसानी से समझा जा सकता है।
  4. प्रकरण उपागम में शिक्षक का विषय वास्तु पर पूर्ण रूप से नियंतरण होता है।
  5. यदि प्रकरणों का चयन अच्छे से किया जाए तथा उसका प्रस्तुतीकरण को अच्छे से किया जाए तो प्रकरण उपागम का प्रयोग शिक्षा के सभी स्तरों में आसानी से किया जा सकता है।

यह भी जानें-

पाठ्यक्रम एकीकरण

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पाठ्यवस्तु या पाठ्यविवरण 

समकालीन भारतीय समाज में शिक्षा के उद्देश्य

Topical Approach

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